विश्व खाद्य दिवस पर डॉ.आशुतोष उपाध्याय की कविता

डॉ.आशुतोष उपाध्याय की कविता : बेहतर जीवन और बेहतर भविष्य के लिए भोजन का अधिकार   (1) आओ मित्रों! 16अक्टूबर 2024 को, विश्व खाद्य दिवस कुछ इस प्रकार मनायें भोजन…

अरुण दिव्यांश की कविता: भुट्टा

अरुण दिव्यांश की कविता: भुट्टा वो देखो अनोखा भुट्टा , आग पे कैसे पक रहा है । भुट्टा देख मुॅंह पानी आया , दूर बैठ कोई तक रहा है ।।…

बच्चों के चारित्रिक विकास का सशक्त माध्यम है बाल साहित्य : सिद्धेश्वर

पटना (कार्यालय प्रतिनिधि)। बच्चों के मनोविज्ञान को केंद्र में रखकर लिखी गई कविता कहानी ही बाल साहित्य नहीं होता, और न सिर्फ बच्चों के द्वारा लिखी गई बाल रचनाएं बाल…

गीत : स्वप्न का परिवेश गढ़ दो

डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय मौन करुणा के इशारेमें लिखा सन्देश पढ दोस्वप्न में आया हुआ जोवह नया परिवेश गढ़़ दो मील के पत्थर लिखे हैंकाल ने ख़ुद लेखनी सेमाप बाकी…

अरुण दिव्यांश की कवित : हिन्दी

हिन्दी: अरुण दिव्यांश हिन्दी हूॅं मैं हिन्द का गर्व है मुझे हिन्द पर ।किंतु सोया भारत ऐसे ,चकित हूॅं इस नींद पर ।।हर राष्ट्र में सम्मान बढ़ा ,निज गृह मेरा…

साहित्य कला और संगीत की विलक्षण प्रतिभा की धनी हैं डॉ. शैलजा रौला : सिद्धेश्वर

पटना (कार्यालय प्रतिनिधि)। संगीत हो या कला, हमारे जीवन को संगठित करने और हमारे भीतर ऊर्जा भरने की अद्भुत क्षमता रखती है। संगीत हमारे भीतर उत्साह पैदा करता है, तो…

अशोक अंजुम काव्य विधा के संपूर्ण कवि है : सिद्धेश्वर

पटना (कार्यालय प्रतिनिधि)। ग़ज़ल को साधना और दूसरी तरफ ग़ज़ल के लहजे में बात करना, दोनों ही आंतरिक चेतना है और इस आंतरिक साधना और वैचारिक अभिव्यक्ति में, लब्ध प्रतिष्ठित…

संभावनाओं के द्वार खोलती है पंकज साहा की लघुकथाएं : सिद्धेश्वर

डॉ.पंकज साहा की लघुकथाएं कबीर की वाणी की तरह सटीक और व्यंग्यात्मक संवाद शैली में होती है : निशा भास्कर पटना (कार्यालय प्रतिनिधि)। भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में…

स्मिता गुप्ता की कविता : गुलमोहर

स्मिता गुप्ता की कविता : गुलमोहर एक दिन हमने प्रेम के प्रतीकएक गुलमोहर का बिरवा रोपाज्यों- ज्यों बढ़ा बिरवात्यों- त्यों परवान चढ़ा हमारा प्रेमज्यों- ज्यों खिला गुलमोहरत्यों- त्यों खिली हमारी…

लघुकथा लेखन संक्षिप्तता का संयोजन नहीं बल्कि एक साधना है : सुनीता मिश्रा    

  पटना (सोनमाटी समाचार नेटवर्क)। कौन कहता है लघुकथा का विकास नहीं हो रहा ? लघुकथा में नित्य नए प्रयोग हो रहे हैं, यह संकेत मिलता है आज के कई समकालीन…

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