प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता का समायोजन बड़ी चुनौती

कई राज्यों में प्राथमिक स्तर पर बुनियादी कौशल में बच्चे तय स्तर से नीचे पाए गए हैं। यह स्थिति एक दशक से ज़्यादा समय से सरकारों के संज्ञान में भी…

पाठकीय प्रतिबद्धता पर निर्भर लेखक की रचना के अर्थ की डी-कोडिंग

भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक और नोबेल पुरस्कार विजेता  वीएस नायपॉल का 12 अगस्त को निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे। उनका पूरा नाम विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल था।नायपॉल…

सवाल : क्या रोजी-रोटी से अलग अब अपने वजूद की भी सोचेंगे बिहार के युवा?

बिहारियों की मेहनत, हिम्मत, जीवटता का अंदाजा तो हजारों किलोमीटर दूर पत्थरों-जंगलों के बियावान में जाकर मारिशस, फिजी और सूरीनाम को गुलजार बनाने वाले लोगों के रूप में देखकर लगाया…

समय लिखेगा इतिहास : सोनमाटी का विशेष संयोजन

30 मई 2018. हिन्दी पत्रकारिता ने  192 साल की यात्रा पूरी कर अपने पांव  193 साल के पायदान पर रख दिया है। इस मौके पर साप्ताहिक सोनमाटी (प्रिंट संस्करण, स्थापना …

हम भी हैं इंसान !

आज लोगों की दुनिया फेसबुक की डिजिटल दुनिया में लाइक और गपशप जैसे फालूत कॉमेन्ट करने तक सिमट चुकी हैं। हम वास्तविकता से कोसों दूर हैं। आज इस हालत पर…

इच्छामृत्यु : मौत अलग नहीं, जीवन का हिस्सा

प्रतिबिंब : सोनमाटी का संपादकीय पृष्ठ   उच्चतम न्यायालय का युगांतकारी फैसला देश के उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने परोक्ष इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेसिया) के लिए लिखी गई…

राजनीति में शुचिता आखिर कब?

दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार-कवि मनोजकुमार झा की फेसबुक में सोनमाटीडाटकाम की वाल पर सोनमाटी के नए अंक पर निम्नटंकित प्रतिक्रिया। उन्हें धन्यवाद। – संपादक बहुत ही उम्दा सामग्री-संयोजन। आँचलिक पत्रकारिता…

प्रलय आने में सिर्फ ‘दो मिनटÓ बाकी !

(संपादकीय/विचार : कृष्ण किसलय)। बिगड़ते पर्यावरण को लेकर 184 देशों के 16 हजार वैज्ञानिकों की संस्था पहले ही मानव जाति के नाम अपनी दूसरी चेतावनी जारी कर चुकी है। और अब,…

और समय लिखेगा इतिहास…

और समय लिखेगा इतिहास : बिहार के तीन वरिष्ठ पत्रकारों सुरेन्द्र किशोर, गुंजन सिन्हा और अनिल विभाकर के फेसबुक वाल पर पोस्ट की गई सामग्री यहां सोनमाटी के पाठकों के…

सत्तर साल की कहानी !

– कांग्रेस अध्यक्ष डी. संजीवैया  ने 1963 में कहा था, 1947 में भिखारी आज करोड़पति बन बैठे – अपवादों को छोड़कर लूट में गांधीवाद, नेहरूवाद के साथ समाजवाद , लोहियावाद…

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समयसीमा पर समयसीमा बीती, फिर भी नहीं खुला पाली ओवरब्रिज
भारतीय दृष्टि से इतिहास लेखन पर मंथन, युवा इतिहासकार संगोष्ठी में 200 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत