मतदान जागरूकता पर अरुण-दिव्यांश की कविता

अरुण-दिव्यांश की कविता : मतदान जागरूकता दान करो मतदान करो,मतदान हेतु आह्वान करो ।दान करो निदान करो,समय तुम पहचान करो ।।मान करो कल्याण करो,समय तुम अवदान करो ।पहले निज मतदान…

कुमार बिंदु की कविता : क्षमा करना प्रिये

कुमार बिंदु की कविता : क्षमा करना प्रिये क्षमा करना प्रियेमैं नहीं टांक सकतातुम्हारे बालों में गुलाबक्षमा करना प्रियेमैं नहीं जताना चाहता हूं प्रीततुम्हारे जूड़े में बांधकर फूलों का गजरामैं…

सोन-तट का उस्ताद शायर : नासेह नासरीगंजवी

सोन-तट का उस्ताद शायर : नासेह नासरीगंजवी यह 1994-95 की बात है। जब मैं बक्सर की गलियों में कविता की आवारगी में घूमा करता था। वह उर्दू के तरही मुशायरों…

संगीत के साथ-साथ चित्रकला द्वारा भी विभिन्न उपचार किए जाते हैं : आस्था दीपाली

पटना (सोनमाटी समाचार नेटवर्क)। भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के द्वारा आयोजित ऑनलाइन के माध्यम से यूट्यूब व हेलो फेसबुक पर कला एवं संगीत सम्मेलन का संचालन करते हुए सिद्धेश्वर ने कहा…

नए सृजन के लिए सृजनात्मक भूमि का काम करती है, घरेलू साहित्यिक गोष्ठियां

पटना (सोनमाटी समाचार नेटवर्क)।  पटना में ‘‘युगानुगूँज‘‘  के तत्वाधान में डा.निशि सिंह के आवास पर ‘‘पटना काव्य गोष्ठी‘‘ का आयोजन हुआ। ‘‘युगानुगूँज ग्रुप‘‘ एक  साहित्यिक संस्था है जो हिंदी, उर्दू…

कुमार बिंदु की कविता : क्या तुम जादू जानती हो

कुमार बिंदु की कविता : क्या तुम जादू जानती हो क्या तुम जादू- टोना करना जानती हो प्रियेअगर तुम जादू- टोना नहीं जानती होतो फिर ऐसा क्यों होता हैकि तुम्हारे…

लघुकथा में अनावश्यक विस्तार से बचना चाहिए : सिद्धेश्वर

पटना (सोनमाटी समाचार नेटवर्क)।  हर लेखन के पीछे अपना एक अलग उद्देश्य होता है। किसी भी लेखक को बिना उद्देश्य अपनी रचनाओं का सृजन नहीं करना चाहिए। सिर्फ प्रकाशन का…

सिद्धेश्वर की रेखाचित्र काव्य कृति “कैनवास पर बिखरे मोती” का लोकार्पण

पटना (सोनमाटी समाचार नेटवर्क)। निराकार में आकार एवं शब्दों में चिंतन को पा लेना बड़ी बात है l ऐसे में सिद्धेश्वर जी का रेखाचित्र एवं साथ में उनकी छोटी छोटी…

डा. रूबी भूषण की दो कविताएं

डॉ.रूबी भूषण‌‌ करीब दो दशक से शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इनकी कहानियों का संकलन ‘टेम्स नदी बहती रही’ है। दूरदर्शन और आकाशवाणी से इनकी…

कुमार बिंदु की कविता : जादूगरनी रात और जादुई सपने

कुमार बिंदु की कविता : जादूगरनी रात और जादुई सपने कल फिर आयी थी सांवली सलोनी रातमाथे पर चांद की टिकुली लगाएजुल्फों में सितारों के गजरे सजाएदबे पांवमेरे घर, मेरे…

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