सत्तर सालों में क्या बन पाया मुकम्मल गणतंत्र ?

हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष होने की बात पर जोर देता है और ऐसे समाज के निर्माण की बात करता हैं, जिसमें सभी समान हों, सबको अपना हक मिले। मगर समाज कभी…

सवाल : हमसे स्कूल दूर या हम ही स्कूल से बाहर?

दिल्ली से सोनमाटी मीडिया समूह के प्रिंट एडीशन सोनमाटी और ग्लोबल न्यूज-व्यूज पोर्टल सोनमाटीडाटकाम के लिए बाल शिक्षण प्रविधि विशेषज्ञ और शिक्षा विषयों के लेखक कौशलेन्द्र प्रपन्न का लेख  …

भारत के सोन नद अंचल (बिहार) केन्द्रित साप्ताहिक समाचार-विचार पत्र सोनमाटी का नया अंक बाजार में

भारत के सोन नद अंचल (बिहार) केन्द्रित साप्ताहिक समाचार-विचार पत्र   सोनमाटी का नया अंक बाजार में –>> (इस अंक में )>> 1. संक्षिप्त संपादकीय : आधार में सुधार (संपादक की…

सोनमाटी मीडिया समूह का प्रिंट एडीशन (सोनमाटी) का नया अंक बाजार में

1. संक्षिप्त संपादकीय : सर्वनाश-संकट (संपादक की कलम से) इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस संधि से अमेरिका के हटने और नए परमाणु हथियार बनाने की घोषणा से दुनिया एक बार फिर…

मी-टू : अमेरिका से निकली आवाज अब गूंज रही भारत में भी

देशान्तर मी-टू : अमेरिका से निकली आवाज अब गूंज रही भारत में भी इन दिनों मी-टू शब्द पूरी दुनिया में चर्चा में है। मी-टू शब्द का प्रयोग सबसे पहले 2006…

प्रशांत किशोर : जदयू की बारगेन क्षमता बढ़ाने और कद्दावर वजूद की चुनौती

– समाचार विश्लेषण – कृष्ण किसलय पटना (विशेष प्रतिनिधि)। देश में चुनावी रणनीतिकार के रूप में चर्चित प्रशांत कुमार जदयू के साथ अपनी राजनीतिक पारी की आगाज कर चुके हैं।…

हे हमारी हिन्दी, मंच न गोष्ठी तुम सदा रहना जीवन में

दिल्ली से लेखक-पत्रकार-कवि कौशलेन्द्र प्रपन्न द्वारा हिन्दी दिवस (14 सितम्बर) के अवसर विशेष पर सोनमाटीडाटकाम के लिए लालित्यपूर्ण संवाद शैली में लिखी गई इस रचना में राजभाषा हिन्दी की सात…

प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता का समायोजन बड़ी चुनौती

कई राज्यों में प्राथमिक स्तर पर बुनियादी कौशल में बच्चे तय स्तर से नीचे पाए गए हैं। यह स्थिति एक दशक से ज़्यादा समय से सरकारों के संज्ञान में भी…

पाठकीय प्रतिबद्धता पर निर्भर लेखक की रचना के अर्थ की डी-कोडिंग

भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक और नोबेल पुरस्कार विजेता  वीएस नायपॉल का 12 अगस्त को निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे। उनका पूरा नाम विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल था।नायपॉल…

सवाल : क्या रोजी-रोटी से अलग अब अपने वजूद की भी सोचेंगे बिहार के युवा?

बिहारियों की मेहनत, हिम्मत, जीवटता का अंदाजा तो हजारों किलोमीटर दूर पत्थरों-जंगलों के बियावान में जाकर मारिशस, फिजी और सूरीनाम को गुलजार बनाने वाले लोगों के रूप में देखकर लगाया…

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