जिजीविषा : अम्मा कार्थियायनी ने पाया 96 साल में अक्षरज्ञान

भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र मेरठ (पश्चिम उत्तर प्रदेश) से सोनमाटीडाटकाम के लिए वरिष्ठ पत्रकार ललित दुबे की प्रस्तुति भारतीय जिजीविषा, जीवटता का अप्रतिम उदाहरण हैं कार्थियायनी, जिन्होंने 96 साल…

अम्बष्ट : महान राजवंश के योद्धा मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त के समय बिहार (मगध) आए

 संख्या बल में बहुत कम होने के कारण देश की आजादी अर्थात जनतंत्र में चुनिंदा नहीं रह जाने के कारण कायस्थ राजनीतिक ताकत में बेहद कमजोर हो गए। समाज के…

सोन घाटी : जहां सबसे पहले हुई सामूहिक छठ-व्रत की शुरुआत

डेहरी-आन-सोन (बिहार)-कृष्ण किसलय। भारत के तीन नदों में से एक सोन की पर्वत उपत्यका वाली घाटी (बिहार-झारखंड के रोहतास-औरंगाबाद-पलामू) दुनिया की वह जगह है, जहां सबसे पहले छठ-व्रत की सामूहिक…

चीन का चांद : जिसकी चांदनी से रौशन होंगी उसकी सड़केें और गलियां

दिल्ली से सोनमाटीडाटकाम के लिए प्रदीप कुमार, विज्ञान लेखक धरती-चांद की सृष्टि होने के समय से ही सूरज की प्रचंड किरणों को सोखकर चांद उसे शीतलता में बदलकर दूधिया चांदनी…

रोशनी से गुलजार चिमनियों का चमन और पानी के रेले से प्रकंपित सोन की चौड़ी छाती !

=० स्मृतियों का झरोखा ०= दिल्ली से सोनमाटीडाकाम के लिए शिक्षण-लेखन का कार्य करने वाले कौशलेन्द्र प्रपन्न ने इस संस्मरणात्मक लेख में अपने शहर डेहरी-आन-सोन (बिहार) में किशोर उम्र तक…

…क्योंकि बिहारी हो तो आखिर कुचले-भगाए जाओगे ही न !

गुजरात के वड़ोदरा और फिर पंजाब के अमृतसर की घटनाओं पर स्थानीय समाज के लोगों ने बिहार के प्रवासियों के साथ जो रवैया अपनाया, वह क्या पूरे देश-समाज के लिए…

तीन नारे, जो आजादी के संघर्ष के अपने-अपने तरीके के लिए गढ़े गए

आज समाज के एक हिस्से का जोर वंदे मातरम् (नारा) पर है। जबकि देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान तीन प्रमुख नारों वंदे मातरम्, जयहिंद और इंकलाब जिंदाबाद का जन्म…

गांधी : बिहार में हुआ ‘महात्माÓ अवतार, किया आजीवन अधनंगा रहने का फैसला

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष पर विशेष संयोजन   गांधी : बिहार में हुआ ‘महात्माÓ अवतार, किया आजीवन अधनंगा रहने का फैसला प्रतिबिम्ब /कृष्ण किसलय सौ साल पहले…

केरल जलप्रलय : ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का ही कहर

(प्रतिबिम्ब/कृष्ण किसलय) केरल में करीब एक सदी बाद आई भीषण बाढ़ से पांच सौ से अधिक लोगों की जान गई, लाखों बेघर व विस्थापित होने को मजबूर हुए और कई…

श्रद्धांजलि : अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले हिन्दी के शीर्ष कवि-लेखक-पत्रकार विष्णु खरे

हिंदी के अप्रतिम विलक्षण कवि-लेखक-पत्रकार विष्णु खरे अब हमारे बीच नहीं हैं। हिंदी और अन्य भारतीय भाषा साहित्य में ही नहीं, उनकी पहचान विश्व साहित्य में भी है। वह ऐसे…

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